कांग्रेस ने राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर से घेर लिया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने दसॉ कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया और विमानों की ज्यादा कीमत तय की। जिसके लिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज होना चाहिए.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इंडियन नेगोसिएशन टीम को दरकिनार करके राफेल डील को अंतिम रूप दिया.

राफेल सौदे को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की कुछ बड़ी बातें:

राफेल डील से जुड़ी इंडियन नेगोसिएशन टीम की बात जगजाहिर है. अब साफ है कि मोदी ने देश और संसद को गुमराह किया ताकि पूरे षणयंत्र पर पर्दा डाला जा सके. मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के मुकाबले राफेल की कहीं ज्यादा कीमत अदा की है.

राफेल जहाज खरीद की बैंक गारंटी हटा दसॉ एविएशन को फायदा पहुंचाया.

पीएम मोदी ने कानून मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, डिफेंस अकाउंट सर्विसेस और वित्त मंत्रालय को दरकिनार कर बैंक गारंटी की शर्त को खारिज कर दिया.

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पीएम मोदी ने अपने पद का दुरुपयोग करके दसॉ एविएशन को 4,305 करोड़ रुपये तोहफे में दिये.

राफेल घोटाले में देश के खजाने को नुकसान पहुंचाया गया. इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोध कानून के तहत मामला बनता है.

मोदी सरकार द्वारा खरीदे जा रहे 36 राफेल जहाजों की कीमत यूपीए सरकार में खरीदे जा रहे 126 राफेल जहाजों से कहीं ज्यादा है.

36 राफेल जहाजों की कीमत में चालाकी से इंडिया स्पेसिफिक इनहेसमेंट्स की 1300 मिलियन यूरो यानी पौने 9 हजार करोड़ की कीमत शामिल ही नहीं की गई, ताकि कीमत कम दिखाई जा सके.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत, यूपीए-कांग्रेस सरकार द्वारा खरीदे जा रहे 126 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत से ज्यादा है.

इंडियन नेगोसिएशन टीम के मुताबिक, 36 लड़ाकू विमानों की कीमत 63,450 करोड़ रुपये है, जबकि मोदी सरकार ने दावा किया कि विमानों की कीमत 59,175 करोड़ रुपये है. सरकार ने सरासर झूठ बोला है.

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63,450 करोड़ रुपये भी सही ढंग से नहीं आंका गया क्योंकि इसमें करीब छह साल तक की अवधि के लिए महंगाई दर को जोड़ा गया है जबकि विमान 10 साल में आने है. इस हिसाब से विमानों की कीमत 67 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हुई.

राफेल डील में बैंक गारंटी हटाकर लूट की छूट दी गई. इंडिया स्पेसफिक इनहांसमेंट की कीमत करीब 10 हजार करोड़ रुपये को पूरी लागत में नहीं जोड़ा गया, जबकि इसे भारत को ही अदा करना है.

मोदी सरकार ने राफेल पर की यूपीए सरकार से महंगी डील.

उन्होंने कहा, ‘राफेल डील की असली कीमत 63,450 करोड़ रुपये भी नहीं है, क्योंकि इसका निर्धारण भी इंडियन नेगोसिएशन टीम (INT) ने छह साल के लिए फ्रांस में हर साल 1.22 फीसदी महंगाई दर के हिसाब से आंका है. लेकिन जहाज तो 10 साल बाद आएंगे, तो 10 साल का अगर 1.22 फीसदी भी है तो वो भी आईएनटी की रिपोर्ट में नहीं आंका गया है. आईएनटी की रिपोर्ट में ये लिखा है कि अगर फ्रांस में महंगाई दर 3.50 फीसदी तक पहुंच जाएगी तो सारा आकलन 1.22 फीसदी से नहीं, बल्कि 3.50 फीसदी के दर माना जाएगा.’

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सुरजेवाला ने बताया, ‘10 साल का अगर 1.25 फीसदी भी मंहगाई दर निकालें तो ये कीमत 9000 मिलियन यूरो, यानी 67,500 करोड़ रुपये बनती है.’ उन्होंने कहा कि ये कड़वा सच है जो आईएनटी की रिपोर्ट से साबित हो गया है.

सुरजेवाला ने लगाया डोभाल पर बड़ा आरोप,

सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘‘पीएम मोदी ने इंडियन नेगोसिएशन टीम को दरकिनार कर खुद डील का फैसला किया. यह सनसनीखेज बात सामने आई है कि इंडियन नेगोसिएशन टीम ने फैसला नहीं किया, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने किया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या डोभाल, इंडियन नेगोसिएशन टीम का हिस्सा थे? जवाब नहीं है. क्या सुरक्षा मामले की कैबिनेट समिति ने डोभाल जी को स्वीकृति प्रदान की थी? जवाब नहीं है. यानी मोदीजी के नुमाइंदे ने इंडियन नेगोसिएशन टीम को दरकिनार कर डील को अंतिम रूप दिया.’’

 

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