खादी.लाठी.टोपी जब हम इनके बारे मे सोचते हैं तो हमें याद आते हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी. 2 अक्टूबर का दिन तो केवल वो दिन है, जब हम महात्मा गांधी का जन्मदिन मना लेते हैं. लेकिन सत्य तो ये है कि हर दिन बापू गांधी का दिन है. उनके अहिंसा के पाठ का दिन है, उनके स्वच्छ भारत का दिन है, उनके राम राज्य का दिन है.

आज हम आपको बापू के जमाने के उस स्कूल के बारे मे बताएंगे, जहां आज भी बच्चे और अध्यापक गांधी टोपी लगाकर रखते हैं. हर रोज प्रर्थना में रघुपति राघव राजाराम’ गाते हैं. इस स्कूल में नाजारा सभी स्कूलों से अलग होता है. ये स्कूल मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में लगभग 10 किलोमीटर दूर गांव मे है. इस स्कूल का नाम है शासकीय माध्यमिक बालक शाला.

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इस स्कूल मे सभी बच्चे सिर पर टोपी रखते है यहां पढ़ने  वाले पहली से 8वीं तक के  हर बच्चे के सिर पर गांधी टोपी जो नजर आती है. स्कूल के एक शिक्षक संदीप शर्मा ने बताया, “कब ये परम्परा शुरू हुई ये हमें ठीक-ठीक पता नहीं है. लेकिन स्कूल में एक दीवार पर एक तारीख लिखी है जो कहती है कि 3 अक्टूबर, 1945 को महात्मा गांधी स्कूल पहुंचे थे. और यहां लिखा है, ‘सत्य और अहिंसा के संपूर्ण पालन की भरसक कोशिश करूंगा, बापू का आशीर्वाद.’

बता दें कि स्थानीय लोगों को याद है कि गांधी ने असहयोग आंदोलन के दौरान गांव का दौरा किया था और तब से, ग्रामीणों ने टोपी पहनना शुरू कर दिया, और तभी से स्कूल भी इसी परंपरा का पालन कर रहा है.

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रिकॉर्ड देखने पर पता चलता है कि स्कूल 1844 में शुरू किया गया था. लगभग 175 साल पुराने इस स्कूल में पहले एक उद्योग कक्ष भी हुआ करता था, जिसमें विद्यालय के लिए टाट-पट्टी, टोपी और भी कई समान बनाए जाते थे लेकिन अब ये उद्योग बंद हैं.

खैर, यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि गांधी टोपी पहनने से बच्चों में विश्वास, देशभक्ति और सही मूल्यों का विकास होता है, बच्चे और स्थानीय लोग गांधी टोपी पहनने में गर्व महसूस करते हैं, यहां के लोग कहते हैं कि देश के बाकी लोगों ने भले ही टोपी पहनना छोड़ दिया हो लेकिन ये स्कूल परंपरा के साथ जारी हैं.

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