आज हम आपको किस्सा बताएंगे हिन्दुस्तान के उस निजाम का जो इस दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक था. फिर भी फटे कुर्ते से ही उसकी पहचान होती थी. इन दिनों भी वो निजाम भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का क्रेन्द्र बना हुआ है. तो शुरुआत करते हैं मौजूदा विवाद से और चलते हैं इस निजाम के इतिहास में. विवाद तो ये है कि भारत विभाजन के दौरान हैदराबाद के 7वें निजाम मीर उस्मान अली खान ने लंदन के नेटवेस्ट बैंक में लगभग 8 करोड़ 87 लाख रुपये जमा कराए थे. अब ये रकम बढ़कर 3 अरब 8 करोड़ 40 लाख रुपये हो चुकी है. भारत और पाकिस्तान दोनों देश इस भारी रकम पर अपना अपना हक जता रहे थे. इस मामले मे लंदन की एक अदालत मे केस चल रहा था. निजाम के वंशज प्रिंस मुकर्रम जाह और उनके छोटे भाई इस मुकदमे में भारत सरकार के साथ थे और अब लंदन की रायल कोर्ट ने 70 साल पुराने इस केस में भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है यानी ये पैसा भारत को देने को कहा है. ये फैसला अभी हाल ही मे आया है.

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लेकिन अब चलते है इस निजाम के इतिहास मे क्योंकि जो रकम हमने आपको बताई है ये तो बहुत छोटी रकम है, निजाम के पास क्या-क्या था आप जान कर हैरान हो जाएंगे. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीर उस्मान अली खान के पास इतनी दौलत थी कि एक वक्त तो वे दुनिया के सबसे अमीर आदमी थे.  उनके पास 230 अरब डॉलर की संपत्ति थी. रिपोर्ट्स कहती हैं कि साल 1911 से 1948 तक हैदराबाद पर शासन करने वाले मीर उस्मान अली खान असल में एक सम्राट जैसे वैभव वाले निजाम थे. उनके पास इतनी दौलत थी कि वो समय से हिफाजत नहीं कर पाते थे. एक बार तो चूहों ने निजाम के तहखाने में से नौ मिलियन पाउंड के नोट कुतर कर नष्ट कर दिए थे. निजाम के पास एक 185 कैरेट का जैकब डायमंड था यानी एक हीरा. जो एक शुतुरमुर्ग के अंडे के बराबर के आकार का था. इसकी कीमत 900 करोड़ रुपये है. ये दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हीरा है और अब इस पर भारत सरकार का मालिकाना हक है. कहते हैं कि निजाम इस हीरे को पेपरवैट की जगह इस्तेमाल करते थे. कहते हैं कि हैदराबाद के छठे निजाम महबूब अली खां पाशा ने इस हीरे को जैकब नाम के व्यापारी से खरीदा था. इसलिए इस हीरे का नाम जैकब रखा गया. आपको बता दें कि वैसे इस हीरे को इंपीरियल या ग्रेट व्हाइट या विक्टोरिया के नाम से भी जाना जाता है. ये दक्षिण अफ्रीका की किंबर्ली खान में मिला था और तराशने से पहले इसका वज़न 457.5 कैरट था.

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कहते हैं कि निजाम मीर उस्मान अली खान हमेशा अपनी सल्तनत को लेकर डरते रहते थे. उन्हें हमेशा अपनी सल्तनत की सुरक्षा की चिंता रहती थी. पांच फुट तीन इंच लंबे निजाम खुद धूम्रपान के आदी थे और खुद इतने तगड़े योद्धा भी नहीं थे कि युद्ध लड़ने की क्षमता रखते हों और धन इतना कि संभालें कैसे. आपको उनके धन का अंदाजा तो इस बात से लग जाएगा कि उनके महल के बगीचे में तिरपाल के नीचे लॉरियां थी जो कि बेशकीमती जवाहरातों और सोने की सिल्लियों से भरी थीं. ये लॉरियां बगीचे में एक ही जगह पड़े-पड़े सड़कर खराब हो गईं. वैसे इस बगीचे कि सुरक्षा मे तीन हजार अफ्रीकी अंगरक्षक तैनात रहते थे. क्योंकि ये बगीचा कम तिजोरी ज्यादा थी. कहते हैं कि जैसे-जैसे समय बीतता गया निजाम साहिब कंजूस होते गए. इसका क्या कारण था अभी भी पता नहीं लेकिन हां निजाम अब खुद के बुने मोजे पहनने लगे और फटे कुर्तों को सिलकर पहनने लगे. जबकि उस वक्त भी उनकी अलमारियां बेशकीमती कपड़ों से भरी रहती थीं. बुढ़ापे में वे एक साधारण बरामदे में सोते थे, जिसमें बकरी भी बंधी होती थी. इस वक्त निजाम एक दम बदल चुके थे.

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