आपने मोगली को देखा होगा कैसे वो जंगल पर राज करता है और बिना किसी डर के जंगल में खेलता कूदता है. लेकिन ये तो आपने मूवी में देखा होगा लेकिन आज हम आपको असल ज़िदगी के मोगली से रूबरू करवाने वाले हैं. जी हाँ ये फोटो देखिए झील में 12 साल का एक बच्चा, और उस बच्‍चे को घेरे दो जैगुआर और एक जैगुआर तो उसे गले लगाता दिख रहा है मानो कैमरे के लिए पोज़ दे रहा हो. ये वो तस्वीर थी जो वायरल हो गई. पहली नज़र में इसे फर्जी करार दिया गया लेकिन ऐसा नहीं था.

ये बच्चा टियागो है, और इसका बचपन ऐसे ही गुजरा है. ब्राज़ील में जब से वो पैदा हुआ है, वो जैगुआर के साथ ही खेल-कूद कर बड़ा हुआ है. टियागो ने बताया कि उनके कुछ दोस्त हैं जो ये सोचते हैं कि ये तस्वीर फर्जी है.”

“लेकिन ये कई लोगों को पसंद भी आया है और वो इन से मिलना भी चाहते हैं. अपने अनुभव दूसरे लोगों के साथ शेयर करने में मुझे खुशी होगी.” टियागो के माता-पिता अनाह जैकोमो और लियानार्डो सिलवेइरा पेशे से बॉयोलॉजिस्ट हैं और ब्राज़ील के जैगुआर इंस्टीट्यूट के लिए काम करते हैं.

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उनकी स्टडी का मक़सद अमरीकी महाद्वीप में जैगुआर का रेस्क्यू करना है. सोशल मीडिया पर टियागो की तस्वीर उनके पिता लियानार्डो सिलवेइरा ने ही पोस्ट की थी. लियानार्डो सिलवेइरा कहते हैं, “यहां अपनी हदों को समझना ज़रूरी हो जाता है. जब जैगुआर नजदीक आना चाहेंगे, वे खुद चले आएंगे. वे सामाजिक जानवर नहीं हैं लेकिन इंसानों के साथ वे उम्र भर के लिए रिश्ता बना लेते हैं.”

टियागो की मम्मी बताती हैं कि उनके बेटे और जैगुआर के बीच कभी कोई हादसा नहीं हुआ है लेकिन वे ये भी जोर देकर कहती हैं कि उन्होंने टियागो को कभी भी जैगुआर के साथ अकेले भी नहीं छोड़ा है. “हम हमेशा ही सर्तक रहे हैं. न केवल जैगुआर के साथ बल्कि दूसरे जानवरों के साथ भी हम सतर्क रहते हैं. सुरक्षा को लेकर हमारे नियम स्पष्ट हैं.

अनाह जैकोमो और लियानार्डो सिलवेइरा की ये रिहाइशगाह 123 एकड़ में फैला है और यहां उनके साथ जैगुआर भी रहते हैं. इसके भीतर न तो किसी जानवर को आने की इजाजत है और न ही यहां से बाहर जाना आसान है. जैगुआर इंस्टीट्यूट की स्थापना उन्होंने साल 2002 में की थी. शुरुआत में इसका मक़सद केवल जैगुआर की स्टडी करना था लेकिन बाद में ब्राजील में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के लिए काम करने वाली सरकारी एजेंसी के कहने पर उन्होंने अपना मन बदल लिया और यहां अनाथ शावकों की भी परवरिश की जाने लगी.

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टियागो के पिता ने बताया कि मेरे बेटे का जन्म जैगुआर के बीच ही हुआ है. जब वो बहुत छोटा था, तभी से उसने उनके साथ जीना सीख लिया था. बेशक हमनें उस पर बंदिशें भी लगाई हैं.”

“लेकिन उसे पता है कि इनके साथ कैसा बर्ताव किया जाता है. उसके लिए ये बहुत नैचुरल है. ये सब टियागो की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है. इसमें कुछ भी अजीब नहीं.” जब टियागो का जन्म हुआ था तो अनाह जैकोमो और लियानार्डो सिलवेइरा पहले से ही जैगुआर के तीन बच्चों की देखभाल कर रहे थे. टियागो बताते हैं, “ये प्यार और आदर का रिश्ता है. जानवरों की देखभाल के काम में मम्मी-पापा की मदद करके मुझे हमेशा ही खुशी मिली है.”

टियागो के पिता लियानार्डो सिलवेइरा ने अपने बेटे को वो बातें सिखलाई हैं जो वो दूसरे लोगों को हमेशा से बताते रहे हैं कि जैगुआर से सामना होने पर क्या किया जाना चाहिए. वे बताते हैं, ये जानवर इंसानों का शिकार नहीं करते. वो  बस हमारी हरकतों पर प्रतिक्रिया जताते हैं. इसलिए उन्हें इज़्ज़त देना बेहद अहम है.

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उनके शरीर की भाषा ये बतला देती है कि आपका क़रीब आना, उन्हें पसंद है या नहीं.टियागो को अपने जैगुआर दोस्त बहुत याद आते हैं. ये बच्चा बताता है कि उसके लिए ये मुश्किल है. बहुत छोटी उम्र से वो उनके साथ रहा है. जब भी टियागो घर जाता है तो मुझे लगता है कि  जैगुआर मुझे बहुत याद करते हैं.और वो मेरे साथ खेलते हैं.

बता दें जैगुआर दुनिया के लुप्त हो रहे जीवों में से एक है. हालांकि दुनिया के 21 देशों में ये पाए जाते हैं.माना जाता है कि दुनिया में तकरीबन 20 से 30 हज़ार जैगुआर होंगे और इनमें से आधे ब्राज़ील में पाए जाते हैं. सिलवेइरा परिवार के पास लाए जाने वाले जैगुआर जंगल में कभी नहीं छोड़े जाते हैं. इसकी वजह ये है कि किसान अपनी फसल बचाने के लिए इन्हें मार न दें. बता दें सोशल मीडिया पर वायरल हुई ये  मशहूर तस्वीर इसी 15 नवंबर को ली गई थी. टियागो भी अपने मम्मी-पापा की तरह बॉयोलॉजी ही पढ़ना चाहते हैं.

 

 

 

 

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