114 साल में बनकर तैयार हुए इस खूबसूरत मंदिर ने ताजमहल को भी पीछे छोड़ दिया.

ताजमहल को लेकर समय-समय पर विवाद उठता रहता है. अभी कुछ दिनों पहले ही ताजमहल से जुड़ा एक मामला सामने आया था. बता दें इस विवाद में बजरंग दल कूद पड़ा है. ताजमहल में जुमा के अलावा अन्य दिनों में भी नमाज अदा किए जाने पर राष्ट्रीय बजरंग दल ने विरोध जाहिर किया था.

साथ ही एलान किया है कि अब ताजमहल में पूजा-अर्चना की जाएगी. बजरंग दल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ताज में मंगलवार को नमाज पढ़ने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन होगा.

Radhaswami Mandir

ये तो रही विवादों की बात लेकिन क्या आपको पता है कि ताजमहल के सामने ताजमहल जैसी ही एक और खूबसूरत ईमारत बन रही है. जी हाँ ताजमहल के सामने 114 साल से बन रही इस इमारत की नींव भी ताजमहल की तरह से कुओं पर रखी गई है. इसे बनाने में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है.

न्यू आगरा से पोइया घाट जाने वाली रोड पर पडऩे वाला ये राधास्वामी मंदिर है. बता दें इस मंदिर का मुख्य द्वार विशाल और भव्य बनाया गया है. मंदिर पूरा सफेद पत्थरों का बना हुआ है. मुख्य द्वार से मंदिर का दृश्य और सुंदर दिख सके इसके लिए प्रवेश द्वार को पूरा लाल पत्थरों से बनाया गया है.

जरुर पढ़ें:  क्या आप कर सकते हैं, चाइनीज़ गर्ल के इस चैलेंज को एक्सेप्ट?

 

लाल पत्थरों के बीच से सफेद मंदिर का दृश्य देखने लायक होता है. बता दें मंदिर के प्रवेश द्वार को बनाने में जो लाल पत्थर इस्तेमाल हुए हैं वो राजस्थान के भरतपुर जिले से मंगाया गया है.

पंचमुखी द्वार के ऊपरी पट पर गुंबद बनाए गए हैं. पूरा गेट लाल पत्थर से बनाया गया है. जिससे आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. गेट के चारों ओर रंग-बिरंगी लाइट लगाई गई है.आपको बता दें कि इस सुन्दर और विशाल राधास्वामी मंदिर को पिछले 114 सालों से बनाया जा रहा है. इस साल अगस्त में मंदिर का 99 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.

इस मौके पर राधास्वामी मत के संस्थापक परम पुरूष पूरन धनी स्वामी महाराज का 200वां जन्म समारोह भी आयोजित किया गया. स्वामी महाराज का जन्म अगस्त में पड़ता है तो इसी के चलते मंदिर निर्माण से जुड़ा सभी काम पूरा कर लिया गया.

खास बात ये है कि मंदिर में लगे पत्थरों को मजदूरों द्वारा हाथों से तराशा जा रहा है. मंदिर में शीतलता, सौम्य और शांति का माहौल बनाए रखने के लिए रंगों के चुनाव को भी महत्वता दी गई है इसलिए 5 तरह के पत्थरों का इस्तेमाल मंदिर को बनाने में किया गया है. मंदिर में लगा सफेद और गुलाबी रंग का संगमरमर मकराना राजस्थान से मंगवाकर लगाया गया है. हरे रंग का संगमरमर बड़ौदा गुजरात से मंगवाया गया है.

जरुर पढ़ें:  मुकेश अंबानी की बेटी के शादी के कार्ड की कीमत और खासियत सुनकर आपकी आंखें खुली की खुली रह जायेगी.

अबरी संगमरमर और पाली जैसलमेर, राजस्थान से आया है. दारचीनी पत्थर ग्वालियर, मध्य प्रदेश से लाकर लगाया गया है. गुंबद के अंदर लाइट लगाई गई है, जिससे मंदिर की सुंदरता रात में भी निहारी जा सके. गुम्बद को तैयार करने के लिए लाखों रुपये के किराए पर मशीनरी मंगाई गई थी.

बता दें 15 किलो सोने की परत का और 140 किलो सोने से नक्काशी किया गया कलश गुम्बद पर लगाया गया है. साथ ही स्वामीबाग में पूरन धनी स्वामीजी महाराज की पवित्र समाधि के लिए बने कलश पर सोना चढ़ाया गया है. कलश पर 155 किलोग्राम सोने की परत से नक्काशी की गई है. इतिहास में यह अब तक का सबसे अनोखा कलश है.


भले ही स्वामीबाग मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, लेकिन है दयालबाग क्षेत्र में. दयालबाग और स्वामी बाग दोनों ही राधास्वामी मत के अनुयायी हैं, 52 कुओं पर स्वामी बाग मंदिर का निर्माण किया गया है, ताकि भूकंप आने पर कोई प्रभाव न पड़े. मंदिर की नींव पूरी तरह से कुओं पर रखी गई है. मंदिर के मेन गेट पर भी एक कुआं है. इस कुएं का धार्मिक महत्व भी है. इसके पानी को प्रसाद के रूप में पिया जाता है.

जरुर पढ़ें:  ओह! तो यहां से आई थी, आपके फोन वाली ये 'स्माइली' इमोजी

110 फीट ऊंचे मंदिर को बनाने में हर रोज करीब 300 मजदूरों ने काम किया है. खास बात ये है कि जो मजदूर 1904 में इस मंदिर को बनाने के लिए आए थे बाद में भी उन्हीं की पीढ़ी काम करती रही है. इस वर्ष जब मंदिर बनकर तैयार हुआ है तो 1904 में आए मजदूरों की चौथी पीढ़ी ने इसे अंतिम रूप दिया है.

Radhaswami Mandir

 

बता दें राधास्वामी मत के संस्थापक और प्रथम गुरु परमपुरुष पूरनधनी स्वामी जी महाराज का जन्म आगरा की पन्नी गली में 25 अगस्त, 1818 को जन्माष्टमी के दिन खत्री परिवार में हुआ था. उनका नाम सेठ शिवदयाल सिंह था. पिता का नाम राय दिलवाली सिंह था. छह साल की उम्र में ही योगाभ्यास शुरू कर दिया था. वे स्वयं को एक कमरे में कई-कई दिन तक बंद कर लेते थे. उन्होंने हिन्दी, फारसी, उर्दू और गुरुमुखी भाषा सीखी. फारसी पर किताब भी लिखी.

Loading...