इस भिखारी के आगे प्रशासन ने टेके घुटने, लोगों ने ठोका सलाम.

समाज में भिखारियों को ओछी निगाहों से देखा जाता है. वो इसलिए क्यों कि देश में ऐसे भिखारी बड़ी संख्या में हैं जो हस्टपुस्ट होते हुए भी भीख माँगकर बड़े आराम का जीवन जीते हैं. एक-एक, दो-दो के सिक्कों से उनके पास अच्छी-खासी दौलत जमा हो जाती है. जिसके बाद वे मजे से खाते-पीते हैं और नशा भी करते हैं.

लेकिन कुछ भिखारी ऐसे भी है जो कुदरत की मार के कारण अपने पेट को भरने के लिए भिख मांगते हैं. इन सब बातों का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्यों कि एक दिव्यांग भिखारी ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसने पूरे देश के लिए एक बड़ा संदेश दिया.

दरअसल पंजाब के पठानकोट चौक-चौराहे पर राजू नाम एक दिव्यांग भिखारी भीख मांगता है. एक दिन जब राजू भीख मांगने के लिए पठानकोट शहर के ढ़ागू रोड पर जा रहा था तो रास्ते में एक टूटी पुलिया से हादसे का शिकार हो गया. फिर क्या था उसने पुलिया की मरम्मत कराने के लिए भीख के पैसे जोड़ने शुरू कर दिए. और जब पैसे जुड़ गए तो उसने मिस्त्री को बुलाकर पुलिया की मरम्मत करना शुरु कर दिया.

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जिसने भी इस नज़ारे को देखा वो हैरत में रह गया. क्यों इस टूटी पुलिया से हादसे का शिकार राजू ही नहीं बल्कि कई लोग भी हुए. प्रशासन से इस टूटी हुई पुलिया की स्थानीय लोगों ने कई बार मरम्मत कराने की शिकायत की. लेकिन प्रशासन के कानों पर कतई भी जूं नही रेंगी.

और फिर राजू ने लोगों से इंसानियत की भीख मांगकर इस पुलिया की मरम्मत कराई. राजू के इस बहादुरी भरे काम से पठानकोट शहर के अधिकांश लोग उसे जानने लग गए हैं. जो लोग नहीं जानते वो उसे देखने के लिए आतुर हो उठते हैं. राजू का अदाज़ भी अब कुछ ऐसा हो गया है. कि लोगों को जब उसके नेक काम के बारे में पता चलता है तो भीख देने के लिए. बढ़े हाथ सलाम को उठ जाते हैं.

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स्वार्थ के गंदे नाले पर बनी नेकी ये पुलिया बड़ी नसीहत है. नसीहत उन लोगों के लिए जो नियति से भिखारी न सही, पर नियत के पक्के भिखारी हैं. नसीहत उस समाज के लिए जो खुद को सभ्य कहता है, पर असल में है नहीं. अपने में मस्त है, व्यस्त है, स्वाथी है. नसीहत उस प्रशासन के लिए जो जनसेवक है, पर दिव्यांग राजू से भी अधिक लाचार है. शहर के लोगों को पता चला कि पुलिया दिव्यांग भिखारी राजू ने वनबाई है तो सभी ने राजू को सलाम ठोका.

बता दें कि जो भी लोग राजू को दान के रूप में सहयोग करते हैं. इन पैसों से राजू जरूरतमंद परिवारों की हरसंभव सहायता करता है. यही नहीं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर साल कुछ सिलाई की मशीनें उपलब्ध कराता है. क्या आपके आस-पास भी ऐसा कई भिखारी है जिसने ऐसा बहादुरी वाला काम किया हो.

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