लोगों ने सोलर एनर्जी का इस्तेमाल कर सोलर कुक्कर,सोलर गीजर तक बनाया. जिससे कम इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल हो सके. लेकिन बात करें बल्ब या टूयबलाइट की तो इसका इस्तेमाल तो बिजली खर्च देकर चुकाना ही पड़ता है. हाँ दोपहर में सूरज की किरणें नेचुरल इलेक्ट्रिसिटी का काम कर देती हैं लेकिन रात को सभी घरो में LED बल्ब या TUBELIGHT भारी संख्या में इस्तेमाल की जाती है।

अगर ऐसा हो जाए कि अब रात को भी आपको अपना बल्ब जलाने की जरुरत नहीं पड़ेगी. तो आप कैसा महशूस करेंगे. शायद आप चौक गए होंगें. दरअसल रात को सूरज की रोशनी नहीं बल्कि चाँद की चांदनी ही आपके घरो को रोशन कर देगी और वो भी इतना की किसी भी TUBELIGHT या बल्ब को जलाने जरुरत ही नहीं पड़ेगी.

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जी हां अब मार्किट में आर्टिफीसियल पेड़ पौधों,फूल, फल की तरह ही आर्टिफीसियल चाँद बनाने की तैयारी की जा रही  है. इलाकों से स्ट्रीट लाइट हटाने और बिजली पर खर्च घटाने के मकसद से 2020 तक अपना खुद का आर्टिफीसियल चंद्रमा लॉन्च करने की योजना की जा रही है. बता दें ये आर्टिफीसियल चंद्रमा बिलकुल चंद्रमा की तरह ही चमकेगा, खास बात तो ये है कि ये चाँद की तुलना में आठ गुणा ज्यादा रोशनी देगा.

साथ ही सूर्य से प्रकाश से चमकने वाला ये सेटेलाइट 50 वर्ग किलोमीटर तक के इलाके को रोशन करने में सक्षम होते हैं, तो ये शहरी इलाकों में सड़कों पर लगी बत्तियों (स्ट्रीट लाइट) की जगह ले सकते हैं. जिससे चीन को सालाना 1.2 अरब युआन (17 करोड़ डॉलर) की बचत होगी. बता दें ये योजना चीन के दक्षिण पश्चिमी सिचुआन प्रांत के चेंगदु शहर कर रहा है.

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इस परियोजना पर काम कर रहे ऑर्गनिज़शन तियान फु न्यू एरिया साइंस सोसाइटी के प्रमुख वु चुनफेंग ने कहा कि ये पहला ह्यूमन मेड चंद्रमा, शिंचांग सेटेलाइट लांच सेंटर से इस प्रोजेक्ट पर काम किया जाएगा और पहले लॉन्च  के सफल होने पर 2022 में तीन और आर्टिफीसियल चंद्रमा पर काम किया जायेगा. साथ ही बताया कि पहला लॉन्च एक्सपेरिमेंटल होगा, लेकिन 2022 में भेजे जाने वाले सेटेलाइट वास्तविक होंगे, जो बड़े पैमाने पर कोमर्सियल रूप से भी इस्तेमाल किया जायेगा.

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