एक लकड़ी का फर्नीचर. कुर्सी या फिर टेबल को ही ले लीजिए और जरा ध्यान से देखिए कि कितनी मेहनत लगती है एक लकड़ी को मनपसंद फर्नीचर बनाने में. पहले लकड़ी तोड़ो, सुखाओ, काटो उसे आकार दो और फिर बाकी के काम लेकिन जरा सोचिए अगर आपको पेड़ से सीधा फर्नीचर ही मिल जाए तो. वैसे साइंस और टैक्नालॉजी के जमाने में अगर हम ऐसा सोच भी लें कोई हैरानी नहीं होगी. लेकिन पेड़ से सीधा फर्नीचर हर किसी को थोड़ी देर के लिए सकते में डाल सकता है.

लेकिन ये सच है ’50 साल पुराने किसी पेड़ को काटकर फर्नीचर बनाने से बेहतर है कि पौधों को फर्नीचर के आकार में ही उगाया जाए’. ये कहना है इंग्लैंड में रहने वाले पति-पत्नी गेविन और एलिस मुनरो का. जिन्होंने इस धरती पर नया चमत्कार कर दिया है. ये दंपति सालों से फर्नीचर के आकार में ही पौधे उगा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो  वो अब तक 50 मेज, 100 लैंप और 250 कुर्सियां उगा चुके हैं.

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गेविन ने पौधों को फर्नीचर के आकार में उगाने की शुरुआत साल 2006 में की थी. उस समय उन्होंने सिर्फ कुर्सियां उगाईं थी. जब कुर्सियां सही सलामत उगने लगी तो गेविन के अंदर इस काम को करने का जुनून ही सवार हो गया.

साल 2012 में गेविन ने एलिस से शादी कर ली. उसके बाद दोनों ने मिलकर एक कंपनी खोली और अपने आइडिया को एक बिजनेस में तब्दील कर दिया. हालांकि पहली बार जब उन्होंने फर्नीचर उगाया तो उनकी फसल बर्बाद हो गई थी. लेकिन कोशिश करने वालों की हार नहीं होती. लगातार मेहनत करने बाद गेविन को इसमें कामयाबी मिलने लगी. गेविन बताते हैं कि उन्हें पौधे से कुर्सी बनाने का ये आइडिया तब आया था, जब उन्होंने एक बोनसाई के पौधे को देखा था, जो बिल्कुल किसी कुर्सी की तरह लग रहा था.

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पौधों को फर्नीचर की तरह बनाने में काफी समय लगता है. इसके लिए पौधों की डालियों को उसी हिसाब से मोड़ना पड़ता है, जिस तरह का फर्नीचर बनाना हो. एक कुर्सी बनाने में 6-9 महीने का समय लगता है, जबकि ये सूखने में भी इतना ही समय लेता है इन सबके बाद ही ये बिकने के लिए तैयार होती है.

अब तो गेविन और उनकी पत्नी एलिस अब इस काम में माहिर हो चुके हैं. इस तरह उगाई गई एक कुर्सी आठ लाख रुपये में बिकती है. वहीं मेज की कीमत 11 लाख रुपये तक है, जबकि एक लैंप 80 हजार रुपये में बिकता है. जिन्हें खरीदने के लिए लोग भी दूर दूर से आते हैं.

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