चुनाव जीतने के लिए नेता तरह-तरह के हथगंडे अपनाते हैं. यहां तक कि सारी हदों को पार करने वाली बयानबाजी से लेकर हाथपाई तक कर बैठते है. यही नहीं बल्कि सत्ता का नशा चखने के लिए धर्म,वंश जाति के आधार पर लोगों को बांटने तक का भी काम कर देते हैं. ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव से सामने आया है.. मामला दूसरे चरण में नवागढ़ विधानसभा सीट पर हुई वोटिंग का है.

इस दौरान दौरान उम्मीदवार जीत के लिए अजीबो-गरीब कारनामे करते हुए दिखाई दिए.

चौकाने वाली बात तो ये भी है कि बघेल के पूजा-पाठ करने के दौरान पीठासीन अधिकारी ने भी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई. नेता जी का ये विडियो आग की तरह सोशल मीडिया पर फैल गया. जब इसकी भनक बेमेतरा के कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी महादेव कांवरे को पड़ी तो वो एक्शन में आ गए.= मंत्री दयालदास बघेल को नोटिस जारी करके 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है.

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आपको बता दें कि बघेल का ये अजीबो-गरीब कारनामा लोक प्रतिनिधित्व कानून और आईपीसी की धारा 171 के दायरे में आता है. लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 के मुताबिक प्रचार थमने के बाद 48 घंटे की सीमा और मतदान वाले दिन केंद्र के भीतर कोई प्रत्याशी स्वयं का प्रचार नहीं कर सकता. वहीं, आईपीसी के तहत कोई व्यक्ति, प्रत्याशी या दल, किसी भी बूथ के 100 मीटर के दायरे में ना कोई धार्मिक अनुष्ठान करेगा, न ही धार्मिक प्रतीक चिह्नों का प्रचार कर सकता है.

बता दें कि छत्तीसगढ़ में दूसरे और अंतिम चरण के लिए 76.34 फीसदी लोगों ने मतदान किया. तो वहीं मंगलवार को 19 जिलों के 72 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ. दूसरे चरण में 1079 उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें से 113 अनुसूचित जाति और 176 अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवार थे. वहीं 119 महिला उम्मीदवार भी मैदान में थीं. दूसरे चरण की 72 सीटों में से 17 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए और नौ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं.

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