पूरा देश गोवर्धन पूजा का त्योहार मना रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस त्योहार को अपने अपने तरीके से मनाते हैं. कोई इस त्योहार पर गोधन कूटता है, तो कोई गायों की पूजा करता है, तो कोई गोवर्धन पूजा के नाम पर जान को खतरे में डालकर पूजा अर्चना कर रहा है.

गोवर्धन पूजा की शुरूआत

आज हम आपको ऐसी ही पूजा पद्धति बारे में बताने जा रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती है. गोवर्धन पूजा पर्व की शुरूआत तब से हुई जब इंद्र के प्रकोप से बृजवासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी कानी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था. और समस्त ग्रामीणों की रक्षा की थी, लेकिन आज के वक्त में कई जगहों पर गोवर्धन पूजा का अपना अनोखा ही अंदाज है.

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कई जगहों पर गोवर्धन पूजा के लिए लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर त्योहार मना रहे हैं. मध्यप्रदेश के धार, उज्जैन और शाजापुर से गोवर्धन पूजा के मौके पर आस्था की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो शायद अंधविश्वास के आस्था को प्रदर्शित कर रही है.

उज्जैन में गोवर्धन पूजा

धार जिले के कई ग्रामीण अंचलों में गाय और गोहरी पर्व को परंपरा के अनुसार मनाया जाता है. वहीं उज्जैन से 75 किलो मीटर दूर भिडावत गांव में गाय और गौरी पूजन के बाद लोग इकट्ठा होकर जमीन पर लेट गए और लोगों के ऊपर से गांवों की गायों को निकाला गया.

उज्जैन में गोवर्धन पूजा

लोगों के ऊपर से गायों को गुजारने के पीछे ग्रामीणों ने बताया, कि ऐसा करने से उनकी मन्नतें पूरी होती हैं. और इस पूजन विधि में आस्था रखने वाले लोग हमेशा निरोग रहते हैं. उज्जैन में आलम ये है, कि जब गाय लोगों को अपने कदमों से जख्मी कर आशीर्वाद देकर जाती हैं तो लोग तुरंत उठकर ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचने लगते हैं.

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धार और उज्जैन के अलावा शाजापुर में आस्था का अंधविश्वास के चेहरा देखने को मिला है. जहां गोवर्धन पूजा मनाने के लिए इलाके की महिलाएं एक जगह इकट्ठी होकर गाय के गोबर से गोर्वधन पर्वत की अनुकृति बनाती है और यहां पर बच्चों को गोर्वधन पर्वत पर लिटाने की अनूठी परंपरा है, जिसमंर एक दिन के बच्चे से लेकर युवाओं को गोबर से बने गोर्वधन पर्वत पर लिटाया जाता है. जिसके पीछे गवली समाज की मान्यता है, कि इससे बच्चों को किसी तरह की बीमारी नहीं होती. ये परंपरा समाज में सैकड़ों वर्षों से प्रचलित है.

गोवर्धन पूजा में आस्था की ऐसी पूजा विधि जरूर हैरान करती है. बहरहाल अगर बिना जान-माल की हानि हुए कोई सलामत रहे तो ऐसी आस्था विज्ञान को भी चुनौती देती है.

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