दोस्त एक ऐसा चोर होता है; जो आँखों से आंसू, चेहरे से परेशानी,दिल से मायूसी,ज़िंदगी से दर्द और बस चले तो हाथों की लकीरों से मौत तक चुरा ले. ऐसी ही मिसाल पेश करती है एक सिख लड़की.जिसने कसम खा ली है कि वो अपनी दोस्त की ज़िन्दगी बचाने के लिए कुछ भी कर गुज़र सकती है.

Manjot singh kohli and her friend samreen malik

दरअसल ये दो दोस्त 23 साल की मनजोत सिंह कोहली और दूसरी समरीन मलिक एक दूसरे से बेहद प्यार और एक दूसरे की काफी इज़्ज़त करती हैं. दोस्त मनजोत जम्मू के उधमपुर की रहने वाली हैं और समरीन जम्मू से पीर पंचाल हैं. बता दें इनमे से एक दोस्त मुश्किल में है लेकिन दूसरी दोस्त चाहकर भी उसकी मदद नहीं कर सकती. ऐसा क्यों आज हम आपको ये पूरा मामला बताएंगे.

Manjot singh kohli and her friend samreen malik

बता दें बीमारी के चलते समरीन की किडनियां ख़राब हो गईं. अब जिंदा रहने के लिए उसे एक किडनी ट्रांसप्लांट की ज़रुरत है. हिंदुस्तान में ज्यादातर रिश्तेदारों की ही किडनी ट्रांसप्लांट करने को प्रायोरिटी दी जाती है. क्योकि किसी और की किडनी लेने में काफ़ी पेपरवर्क होता है साथ ही किडनी मैच होने में मुश्किल होती है. खैर, अपनी दोस्त की मदद के लिए मनजोत उसे किडनी देने को तैयार हैं. दोनों की किडनी मैच भी है. लेकिन तमाम फॉर्मेलिटी ख़त्म करने के बाद भी मनजोत समरीन को किडनी नहीं दे पा रहीं. वो इसलिए क्योंकि मनजोत के पिता को इससे तकलीफ़ है और उन्होंने ऐसा होने से मना कर दिया है.

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Manjot singyh kohli

क्या आपने दोनों के नाम पर गौर किया एक सिख है तो दूसरी दोस्त मुस्लिम. जहां देश में हिन्दू-मुस्लिम अयोध्या में मंदिर बनेगा या मस्ज़िद के लिए लड़ भिड़ रहे हैं. तो वहीँ ये दोनों दोस्त देश में भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे हैं.

Manjot singh kohli social activist

बता दें इंटरव्यू में मनजोत बताया कि“हम परिवारवालों को कुछ कह नहीं सकते. वो अपने बच्चे से जुड़े हुए हैं. जो वो कर रहे हैं वो ग़लत नहीं है. उनके देखने का नज़रिया ठीक है. पर हमें दूसरों के बारे में सोचना चाहिए. सारे रिश्ते यहीं रह जाएंगें. हमें ज़िन्दगी के बारे में सोचना चाहिए. मैं 18 साल से ऊपर हूं और अपने फ़ैसले ख़ुद ले सकती हूं.”साथ ही मनजोत बताती हैं कि मैं एक सोशल एक्टिविस्ट हूं. मैंने काफ़ी सामाजिक काम करती रहती हूं. उसी दौरान मेरी मुलाक़ात समरीन से हुई. पांच महीने पहले मैंने हमारी एक दोस्त का फ़ेसबुक पोस्ट पढ़ा. वो समरीन के बारे में था. पहले मनजोत को समझ में नहीं आया कि क्या वो उसी समरीन के बारे में है.अगले दिन मनजोत ने फ्लाइट बुक की और समरीन से मिलने पहुंच गईं.

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Manjot singh kohli father

वहीं समरीन को भी अपनी दोस्त मनजोत पर पूरा भरोसा है समरीन कहती हैं कि मनजोत उनके लिए कुछ भी कर सकती हैं. पिछले कई महीनों से मनजोत उनके लिए लड़ रही हैं. हालांकि बीमारी के चलते समरीन को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी. बता दें समरीन के पिता मुख्तार अहमद मलिक  पेशे से एक टेलर है और उनका इस कहना है कि वो इतने पैसेवाला नहीं हैं और पिछले कुछ महीनों में उनके सात से आठ लाख रूपये सिर्फ़ अस्पताल के चक्कर लगा-लगाकर खर्च हो गए हैं. पर समरीन की सेहत में कोई सुधार नहीं आया है.उनका कहना है कि मनजोत अपनी किडनी देना चाहती है. पर उसका परिवार इस बात पर तैयार नहीं है. इसलिए वो नहीं चाहते कि मनजोत परिवार के खिलाफ जाकर कोई डिसिशन लें.

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बता दें मनजोत के पिता ने हॉस्पिटल से ख़ास अपील की है कि मनजोत की किडनी न निकाली जाए. इस सब के बावजूद मनजोत अपनी दोस्त के लिए रोज़ लड़ रही हैं.

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