अगर मै आपसे कहूं कि पुलिसबल का गठन क्यों हुआ? तो जाहिर है आपका जवाब यही होगा कि जिससे समाज अनुशासन में रहे और हम अपनी सारी समस्या उनके सामने रख सके. लेकिन ज्यादातर लोग पुलिस स्टेशन का नाम सुनते ही डरते हैं. साथ ही पुलिस वालों को देखकर दूर भागते हैं. देश के ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी दुखद है. लेकिन एक ऐसी भी आईपीएस अफसर हैं जो खुद लोगों के पास जाकर उनकी शिकायतें सुनती हैं और इसके लिए इन्होने पुलिस स्टेशन को मोबाइल पुलिस स्टेशन बना दिया है.

जी हाँ ये पुलिस स्टेशन को उठकर हर गांव और ज़िले में ले जाती हैं. बता दें महाराष्ट्र के भंडारा जिले में तैनात आईपीएस अफसर विनीता साहू ने इस अभियान की पहल की है. विनीता साल 2017 से ग्रामीण इलाको में अस्थाई पुलिस चौकी लगवाती हैं. जहाँ गांव के लोग अपनी समस्या बताते हैं और शिकायत दर्ज करवाते हैं, इन पुलिस चौकी में एक महिला पुलिस कांस्टेबल के अलावा के पुलिस अधिकारी और दो पुलिस कर्मी नियुक्त होते हैं. इलाके के लोग पुलिस स्टेशन में संपर्क करें, इसके लिए उन्हें अलग-अलग तरीको से प्रोत्साहित किया जाता है.

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दिलचस्प बात तो ये भी है कि पिछले दो वर्षों में इस पहल की ओर विनीता को खासी कामयाबी भी मिली है.
बता दें सोशल ऑडिट रिपोर्ट में विनीता ने कहां कि आज दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है. हर जरुरी चीज़ अब आपके घर के दरवाज़े पर पहुंच रही है. कोई भी सर्विस हो तुंरत उपलब्ध हो जाती है. ऐसे में पुलिस जो देश की सबसे महत्वपूर्ण कानून व्यवस्था और सुरक्षा संगठन है, उसे भी नागरिको की सेवा के लिए हर समय और तेजी से उपलब्ध होना चाहिए.

बता दें एक इंटरव्यू में विनीता ने बताया कि ये अभियान दो सिद्धांतों से प्रेरित था, जिन्हें आज सेवा क्षेत्र में पूरा किया जा रहा है. पहला, सहज सुविधा- जिसे डोर-टू-डोर सेवा कहा जा सकता है और दूसरा सिद्धांत है कि सेवा देने वाले पुलिसकर्मी और नागरिकों के बीच ‘विश्वास’ हो.”

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गांव वालों को पूरी सुविधा रहे इसलिए स्कूलों या ग्राम पंचायतों जैसी इमारतों को पुलिस स्टेशनों में बदला गया है.
जहाँ ऐसा करना मुमकिन नहीं था. वहाँ अस्थायी टेंट में पुलिस स्टेशन बनाये गए हैं. मोबाइल स्टेशन के तौर पर हुई शुरुआत आज नुक्कड़ नाटक, प्रोजेक्टर, एप्लीकेशन आदि से लैस डिजिटल स्टेशन तक पहुँच चुकी है.
इन सबकी मदद से लोगों में जागरूकता बढ़ी और उन्होंने पुलिस से जुड़ना शुरू किया है. अब पुलिसकर्मियों के साथ-साथ ग्रामीणों का व्यवहार भी सकारात्मक हुआ है.

साथ ही धीरे-धीरे, अंधविश्वास के चलते होने वाले अपराध और साइबर अपराधों के मामले कम होने लगे हैं और ये इस बात का प्रमाण है कि आईपीएस विनीता की पहल सही दिशा में आगे बढ़ रही है. इस अभियान की शुरुआत साल 2017 में 28 जनवरी को हुई थी. विनीता द्वारा पेश की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार, इन शिविरों के चलते 1.5 लाख से अधिक लोगों को फायदा पहुँचा है. उन्होंने बताया कि सभी शिविरों की पूरी प्रक्रिया हर एक शिविर से संबंधित रजिस्टर में लिखी जाती है और सभी मामलों की जांच आईपीएस विनीता के सब-डिवीज़न से होती है.

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