भिलाई  के कंडरका गांव की एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे जानकर आप बेहद ही हैरान रह जाएंगें. जी हां कंडरका गांव में एक तालाब है जो कभी नहीं सूखता. इसकी दंतकथा बहुत रोचक है. कहा जाता है कि यहां के मालगुजार की पत्नी ने जिद करके तालाब बनवाया था. बताया जाता है कि स्नान के लिए वह दूसरे गांव के तालाब जाती थी. जहां वहां की महिलाओं ने ऐसा ताना मार दिया कि बालों पर मिट्टी पोत घर लौट आई और पति को संकल्प दिलाया कि जब तक तालाब नहीं तैयार कराएंगे, वह नहाएंगी नहीं. तब जाकर मालगुजार पति ने तालाब बनवाया था.

बताया जाता है कि छतीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुम्हारी के पास स्थित ग्राम पंचायत कंडरका है. गांव के सरपंच और बुजुर्ग रघुनंदन सिंह राजपूत बताते हैं कि 200 साल पहले अंग्रेज के जमाने में यहां गुरमीन पाल गड़रिया की मालगुजरी थी. धन संपदा भरपूर होने के कारण गुरमीन को गौटिया भी कहा जाता था. वे अंग्रेजों के लिए लगान वसूलते थे. कहते हैं  कि उनकी पत्नी बेहद खूबसूरत थीं. वो नहाने के लिए रोज पास के चेटुवा गांव के तालाब जाया करती थीं.

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एक दिन वह बाल में मिट्टी लगाकर नहाने गईं तो चेटुवा गांव की महिलाओं ने उन्हें ताना मार दिया कि इतने बड़े मालगुजर की बीवी के पास नहाने के लिए खुद का तालाब नहीं है. बस फिर क्या था, मालगुजार की बीवी नाराज होकर घर लौट आईं. उसने प्रतिज्ञा की कि जब तक खुद का तालाब नहीं खुदेगा वह बाल नहीं धोएंगी. गुरमीन को जानकारी हुई तो परेशान हो गए और तालाब के लिए जगह खोजना शुरू कर दिया.

छतीसगढ़ में तब पानी मिलना रेत के ढेर में सुई खोजने के बराबर था. भीषण गर्मी का दिन. पूरा गांव तालाब के लिए जगह की तलाश में था. तभी खबर मिली कि गांव की एक भैंस दो दिन से गायब है. जिसकी तलाश शुरू की गई. तो गांव के पूरब दिशा में भैंस कीचड़ से सनी हुई मिली. गुरमीन समझ गए कि पानी यहीं है. उस जगह पर कुदाल पड़ते ही पानी की महीन धार फूट पड़ी. ग्रामीण उसे पाताल से निकली धार कहते हैं. बताते हैं कि इसी धार की वजह से यह तालाब कभी नहीं सूखता.

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जानकारी के मुताबिक दो महीने में 49 एकड़ में बड़ा तालाब खुदकर जब तैयार हुआ था, तब जाकर गुरमीन की बीवी ने बाल धोए. तब से यह तालाब जल देवता बन गया. तब से यह तालाब आस्था और विश्वास का भी प्रतीक है. चौंका देने वाली बात ये है कि तब से आज तक इस तालाब को सूखा किसी ने नहीं देखा. इसका पानी बेहद साफ और मीठा है. इसकी वजह से आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर काफी ऊपर है. इस पर कभी कोई इसमें गंदगी नहीं डालता. यहां के लोग इसमें नहाते भी हैं सिर्फ इतना ही नहीं यहां 49 एकड़ में फैले इस तालाब से 250 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई भी होती है. कंडरका के लोग तालाब का एक बूंद पानी बेकार नहीं जाने देते. एक तरह से यहां के लोग जलसंरक्षण की मिसाल भी पेश करते दिखाई दे रहे हैं.

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