हमशक्ल होना कई बार फायदे का सौदा होता है,तो कई बार ये आपके लिए मुसीबत भी बन जाता है. पीएम मोदी के हमशक्ल होने का अब तक फायदा उठा रहे लोगों से पूछ लीजिए कि इसके नुकसान भी है. और क्या नुकसान है ये सहारनपुर के अभिनंदन पाठक से बेहतर कौन बता सकता है.

लोग इन दिनों पीएम मोदी से काफी खफा हैं इसकी वजह है बढ़ती महंगाई और इन दिनों पेट्रोल-डीजल की कीमतों का आसमान छूना. लोग इस गुस्से को मोदी जी के पास जाकर तो निकाल नही सके. मगर गुस्से में कुछ लोग मोदी जी के हमशक्ल अभिनंदन पाठक को पीएम मोदी ही समझ बैठे. और फिर क्या था लोगों ने गुस्से में आकर पाठक जी पर लात- घूसो की बौछार कर दी. और लोगों ने धुनाई भी इतनी की कि कपड़े तक फाड़ दिए.

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मोदी जी के हमशक्ल अभिनंदन पाठक

अभिनंदन पाठक ने एक न्यूज़ एजेंसी से बातचीत करते हुए बताया कि बीजेपी मोदी जी की सोच के अनुरूप काम और व्यवहार नहीं कर रही है, जिससे मेरा व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हुआ है. पाठक ने बताया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय को मैने पचासो पत्र लिखे. मगर कोई सुनने वाला नहीं है. और सब अहंकार में डूबे हुए हैं.

मेरे से लोग पूछते हैं कि अच्छे दिन कब आएंगे, जिसे लेकर लोगों ने मेरे कपड़े तक फाड़ दिए और लोगों ने चांटे भी मारे. अभिनंदन पाठक ने बीजेपी छोड़ने की घोषणा करने के साथ-साथ कहा कि बात मोदी जी तक नहीं पहुंची, तो मैं सोनिया जी और राहुल गांधी से मिलूंगा और कांग्रेस के लिए प्रचार करूंगा.

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अभिनंदन पाठक मीडिया से बातचीत करते हुए

अब आपको अभिनंदन पाठक के बारे में बताते हैं कि आखिर ये कौन हैं.

दरअसल अभिनंदन पाठक एक राजनेता होने के साथ-साथ और एक स्कूल के भी प्रबंधक हैं. यही नहीं बल्कि जूनियर मोदी के नाम से मशहूर पाठक 2014 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की तमाम रैलियों में नज़र आए थे. और वाराणसी में तो गली-गली में घूमकर इन्होने पीएम मोदी के लिए वोट भी मांगे थे.

पाठक 2014 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की तमाम रैलियों में

बता दें कि ये मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं इनका जन्म भी सहारनपुर में हुआ है. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा भी सहारनपुर जिले से ही हुई है. इन्होने जैन डिग्री कॉलेज से स्नातक और एमए किया. अभिनंदन पाठक एक बहुत ही गरीब परिवार से थे और इन्होने यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष किया है. बता दें कि इनके पिता जूते पॉलिश करते थे और और दूसरे के यहां बर्तन साफ कर करते थे.

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खास बात तो ये है कि इनका जीवन का एक पहलू भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जुड़ा हुआ मोदी जी तो ट्रेन में चाय बेचते थे लेकिन अभिनंदन पाठक ट्रेन में खीरे बेच कर अपना जीवनयापन करते थे. कल तक पीएम मोदी की तरह दिखने के कारण लोग उनका सम्मान करते थे. सर आंखों पर बिठाते थे, सेल्फी खिंचवाते थे और साथ ही चाय नाश्ता करने का आफर भी करते थे. लेकिन अब सब कुछ बदल गया है. लोग देखते ही गुस्सा होने लगते हैं, और मारने को दौड़ते हैं.

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