नागरिकता संशोधन कानून की अधिसूचना जारी होने के साथ ही उत्तर प्रदेश ऐसा पहला राज्य बन गया जहां इस कानून को लागू कर दिया गया था. बता दें कि योगी के एक्शन मोड की यूपी सरकार में शरणार्थियों के पहचान का काम तेज हो गया है.  इसी कड़ी में प्रदेश के गृह विभाग के आदेश पर जिलाधिकारियों ने लोगों की पहचान करना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में देश के सबसे बड़े राज्य यूपी से एक ऐसी खबर आई है जो कि आपको चौकाने का काम करेगी. बता दें कि प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया है कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत प्रदेश के 21 जिलों से अब तक 32 हजार शरणार्थीयों की पहचान की जा चुकी है.

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एक अनुमान के अनुसार यूपी के सभी जिलों से रिपोर्ट आने के बाद ये संख्या एक लाख के करीब पहुंच सकती है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि यूपी के इन 32 हजार शरणार्थीयों पर योगी सरकार क्या एक्शन लेगी. और इनका क्या होगा. तो आपको बता दें कि जैसा की बीजेपी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नागरिकता संशोधन कानून किसी की नागरिकता लेने का नहीं बल्कि नागरिकता देने का कानून है. तो इसी कड़ी में सीएए के तहत नागरिकता के लिए पात्र शरणार्थियों को चिह्नित करते हुए उनकी सूची बनाई जाएगी.

सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के उन नागरिकों को भारत की नागरिकता दी जाएगी जो कि सालों से भारत में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं. गौरतलब है कि ये रिपोर्ट पाकिस्तान की पोल खोलने का काम भी करती है.

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इस रिपोर्ट से साफ हो चुका है कि पाकिस्तान सिर्फ और सिर्फ अल्पसंख्यंकों की नुमाईंदिगी का ढोंग रचने का काम करता है. बता दें कि इस सर्वे से सामने आया है कि ज्यादातर शरणार्थी हिंदू और सिक्ख है और वो  पाकिस्तान में अपने ऊपर हो रहे अत्याचार और प्रताड़ना के चलते भारत में आकर शरणार्थी के तौर पर रह रहे थे. जो कि अब भारतीय नागरिकता हासिल करने के बाद से भारत में गौरव से रह सकेंगे.

 

 

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