यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ का एक्शन मोड विपक्ष पर काफी भारी पड़ रहा है. इस बार सीएम योगी ने जो फैसला लिया है उससे यूपी की राजनीति में भूचाल आ सकता है. जी हां योगी सरकार की तरफ से 41 बीघा जमीन को सरकारी जमीन घोषित कर दिया है. योगी के इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी में हलचल मचने के आसार हैं. क्योंकि ये जमीन समाजवादी पार्टी के दामाद की है. बता दें कि इस जमीन को लेकर 22 सालों से विवाद चल रहा था लेकिन मामला सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा था. और सुलझता भी कैसे, क्योंकि इस पर तो यूपी के सियासतदानों, यानि कि समाजवादी पार्टी का हाथ था. लगातार नोटिस भेजने के बावजूद भी जमीन का गैरकानूनी अधिग्रहण जारी रहा. बता दें कि इस मामले का खुलासा 1997 में ही हो गया था. इसी कड़ी में 5 मई 1997 को नोटिस भी जारी किया गया था. लेकिन साल दर साल इसकी मियाद बढ़ती गई और मामले को टाला जाता रहा.

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दरअसल इस मसले के न सुलझने की असल वजह दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद बुखारी के दामाद और समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी उमर अली खान थे. लेकिन यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने खान की मां के नाम दर्ज इस 41 बीघा जमीन को सरकारी घोषित कर दिया है. जिससे उमर अली खान को तगड़ा झटका लगा है.  तकरीबन 22 साल चली इस कानूनी लड़ाई पर योगी सरकार ने तत्काल एक्शन लेते हुए विराम लगा दिया है. दरअसल बताया जाता है कि पूर्व एमएलसी उमर अली की मां बिस्मिल्ला खान एक जमींदार परिवार से हैं. उनकी सदर तहसील के गांव बरथा कायस्थ में कई एकड़ जमीन है.

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बिस्मिल्ला बेगम के पास अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 की धारा 10(2) के तहत निर्धारित सीमा से अधिक जमीन है. इस कानून की बात करें तो इसके तहत कोई भी व्यक्ति बहु फसलीय अधिकतम 18 एकड़ जमीन ही रख सकता था. इस सीमा से ज्यादा जमीन होने पर सरकार उसे जब्त कर लेगी. हालांकि, हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद पैरवी के अभाव में याचिका निरस्त कर दी थी. इसके बाद ये मामला फिर से अपर जिलाधिकारी की अदालत में आया लेकिन लंबी सुनवाई और बहस के बाद पूर्व एमएलसी उमर अली की मां की 41 बीघा जमीन को सरकार ने जब्त कर लिया है.

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