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बाला साहेब ठाकरे के पोस्टर से हिंदू हुआ गायब, शिवसेना ने पेश की नई तस्वीर
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बाला साहेब ठाकरे के पोस्टर से हिंदू हुआ गायब, शिवसेना ने पेश की नई तस्वीर 

महाराष्ट्र में शिवसेना की नींव रखने वाले कद्दावर नेता बाला साहेब ठाकरे के रूतबे की पहचान उनके भगवा कपड़े, हाथ में रूद्राक्ष की माला, शेर की दहाड़ वाली तस्वीर से की जाती थी. उनका पहनावा और विचारधारा उन्हें लोगों के लिए हिंदू हृदय सम्राट बनाने का काम करती थी. वाकई बाला ठाकरे के लिए सब कुछ राजनीति नहीं था बल्कि राजनीति और सरकारों को खारिज कर खुद को सरकार बनाने या मानने की ठसक थी. महाराष्ट्र में बाल ठाकरे की तूती बोलती थी. उन्हें अपनी इस हिंदूवादी छवि पर गर्व था.

इसीलिए उनके हर पोस्टर की तस्वीर पर हिन्दू शब्द हमेशा नज़र आता था. लेकिन उद्धव ठाकरे ने जो किया है यकीन मानिए उसे देखकर बाला साहेब ठाकरे की आत्मा भी आज रो रही होगी. बाला साहेब ने ठाकरे परिवारसे मुख्यमंत्री बनने का सपना तो जरूर देखा था. लेकिन इसके लिए उद्धव ठाकरे इस कदर समझौता करेंगे वो उन्होंने शायद नहीं सोचा होगा. दरअसल हुआ यूं कि जिन बाला साहेब साहेब के पोस्टर पर आपने हमेशा हिंदूहृदय सम्राट लिखा देखा होगा अब वो हट चुका है. आपको सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन ये ही महाराष्ट्र की बदलती सियासत कीतस्वीर है. जी हां सत्ता बनने के बाद उद्धव ठाकरे ने बाला ठाकरे की नई छविगढ़ना शुरू कर दिया है.

इसके पीछे का असल मतलब बाला ठाकरे की इमेज नहीं बल्कि शिवसेना की छवि बदलना है. क्योंकि भले ही बाल ठाकरे अब हमारे साथनहीं है लेकिन हम सब जानते हैं कि शिवसेना और बाल ठाकरे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दरअसल शिवसेना ने बाल ठाकरे के नए पोस्टरों में हिंदूहृदय सम्राट की जगह वंदनीय हृदय सम्राट लिखा है. गठबंधन के बाद इसे शिवसेना की मजबूरी कहें या कुछ और लेकिन सच्चाई तो ये ही है कि पोस्टरों से हिंदू उतर चुका है. यानि कि शिवसेना अपनी नई छवि गढ़ने जा रही है जिसमें सिर्फ हिंदू नहीं है. ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या हिन्दू को हिन्दू कहना कम्युनल हो जाता है. क्या अपने धर्म पर गर्व करना अब शिवसेना के लिए शर्म बन गया है. हालांकि राज ठाकरे का अब तक इस पर कोई बयान नहीं आया है.

जिन्हें कभी शिवसेना का असली वारिस समझा जाता था. लेकिन शिवसेना की बदलती छवि को अब शिव सैनिक कैसे लेंगे ये भी देखना दिलचस्प होगा. हालांकि बीते दिनों एक शिवसैनिक ने ये कहते हुए शिवसेना छोड़ दी थी कि जो मेरे राम का नहीं वो मेरे किसी काम का नहीं. वजह चाहें जो भी रही हो लेकिन ये तो तय है कि शिवसेना बदल रही है और ये बदलती शिवसेना की तस्वीर है.

 

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