कोर्ट की नौ दिन की सुनवाई में SC/ST एक्ट के 14 मामलों में से 13 मामले निकले एकदम फर्जी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार के लाए गए एससी-एसटी एक्ट को लेकर देश में बड़ा बवाल मचा था. जिसके चलते मोदी सरकार को नाराज संत समाज और सवर्ण समाज के लोगों के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था.

साथ ही नाराज सर्वण समाज की ओर से मोदी सरकार को खुली चुनौती भी दी गई थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो इसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा. यहीं नहीं बल्कि प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के नेतृत्व वाला अखंड भारत मिशन एससीएसटी एक्ट में हुए संशोधन के विरोध में सड़कों पर जमकर उतरा था और जब सरकार ने इनकी मागों को नहीं माना तो देवकीनंदन ठाकुर ने अखंड भारत नाम की पार्टी बनाकर मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में उतरने का एलान कर दिया.

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इन सब बातों का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्यों कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एससी एसटी एक्ट से जुड़े 14 मामलों में से 13 मामले ऐसे सामने आए हैं जो एकदम झूठे साबित हुए हैं.. दरअसल मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विशेष सत्र न्यायालय ने नौ दिन में एससी एसटी एक्ट के 14 मामलों में फैसला सुनाया जिनमें से 13 मामले ऐसे निकले जो पूरी तरह झूठे साबित हुए.

बता दें एससी एक्ट के जाल में ये 13 आरोपी लंबे समय से फंसे आ रहे थे और जिसके चलते इन्हें जेल का मुहं भी देखना पड़ा था. और अब इन आरोपियों पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए तमाम तरह के सबूत की जांच परख करके एससी एसटी एक्ट के जनजाल से दोषमुक्त कर दिया.

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दरअसल कोर्ट ने 14 मामलों पर फैसला सुनाया जिनमें से 13 मामले तो फर्जी साबित हुए लेकिन एक मामला छेड़खानी और एससी-एसटी एक्ट से जुड़ा हुआ निकला.  कोर्ट ने आरोपी को छेड़खानी के मामले में तो तीन साल की सजा सुनाई जबकि एससी-एसटी एक्ट में उसे दोषमुक्त घोषित कर दिया. यानी कि ये भी साफ है कि कोर्ट ने जिस आरोपी को 3 साल की सजा सुनाई है वो सिर्फ छेड़खानी के आरोप में है, न कि एससी-एसटी एक्ट के तहत.

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