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सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले पर अब और बढ़ा दी केन्द्र सरकार की मुश्किलें!
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सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले पर अब और बढ़ा दी केन्द्र सरकार की मुश्किलें! 

राफेल का मुद्दा इन दिनों देश की राजनीति में काफी गरमाया हुआ है. जिसे लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हावी हुए दिख रहे हैं. लेकिन जब इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो सुप्रीम कोर्ट ने इसपर सुनवाई शुरु कर दी.

भारत और फ्रांस के बीच हुए राफेल विमान सौदे पर सुनवाई का दायरा सुप्रीम कोर्ट ने और बढ़ा दिया है. इस सिलसिले पर कोर्ट ने विमानों की कीमत और ऑफसेट पार्टनर के चयन पर भी जवाब मांग है. इससे पहले कोर्ट ने सरकार से सौदे की निर्णय प्रक्रिया की जानकारी सीलबंद लिफाफे में देने को कहा था.

लेकिन अब कोर्ट ने सरकार से ये भी कहा है कि निर्णय प्रक्रिया को लेकर जो भी बातें सार्वजनिक की जा सकती हैं, उनकी जानकारी याचिकाकर्ताओं को भी दी जाए. साथ ही कोर्ट ने सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो सरकार से मिली जानकारी पर जवाब दे सकते हैं. इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी.

आज सुनवाई शुरू होते ही तीन जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, “हमारे आदेश के मुताबिक सरकार ने सीलबंद लिफाफे में सौदा के निर्णय की प्रक्रिया की जानकारी दी है. हमने इसे पढ़ा है. इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. हमें दी गई जानकारी में से जो भी बातें सार्वजनिक करने लायक है, सरकार याचिकाकर्ताओं को वो बता दे.

कोर्ट ने सरकार से ये भी बताने को कहा कि विमानों के लिए ऑफसेट पार्टनर का चुनाव किस तरीके से किया गया. इसकी पूरी डिटेल कोर्ट को दी जाए. चीफ जस्टिस ने कहा- अगर ये जानकारी सार्वजनिक तौर पर बताने लायक नहीं है, तो हमें सीलबंद लिफाफे में दी जा सकती है.

आदेश लिखवाते वक्त कोर्ट ने दर्ज किया कि किसी भी याचिका में विमानों के तकनीकी क्षमता का मसला नहीं उठाया गया है. लेकिन कीमत को लेकर सभी ने संदेह जताया है. ऐसे में कोर्ट का कहना था कि सरकार विमानों की कीमत को लेकर भी सीलबंद लिफाफे में जानकारी दे.

एटॉर्नी जनरल ने कीमत को लेकर जवाब देने में असमर्थता जताई. उन्होंने कहा कि कोर्ट की तरफ से मांगी गई कुछ जानकारी गोपनीयता कानून यानी ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत आती है. कीमत की जानकारी संसद में भी नहीं दी गयी है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “आप अगर इस बारे में जानकारी नहीं दे सकते, तो ऐसा कहते हुए लिखित हलफनामा दाखिल कर दें.

10 अक्टूबर को जब ये मामला पहली बार लगा था, तब सरकार ने याचिकाओं को राजनीतिक बताते हुए सुनवाई न करने की मांग की थी. उस दिन कोर्ट ने कहा था कि आप सिर्फ हमें निर्णय प्रक्रिया की जानकारी सीलबंद लिफाफे में बता दीजिए. सरकार को उम्मीद थी कि कोर्ट आज मामले को बंद कर देगा. लेकिन कोर्ट ने विमान की कीमत और ऑफसेट पार्टनर के चुनाव पर भी जवाब मांग लिया. ऐसे में सरकार की उलझन बढ़ती हुई नजर आ रही है.

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