पुरुषप्रधान समझे जाने वाले भारतीय समाज में महिलाओं को उनका दर्जा और हक दिलाने के लिए, कई एनजीओ के साथ ही खुद सरकार भी अपनी योजनाओं के ज़रिए जुटी हुई है। ये महिलाओं के विकास के लिए मुफ्त शिक्षा, सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। लेकिन महिलाओं की बारे में आई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के बारे में सुनकर आप दंग रह जाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र के मुतबिक पूरी दुनिया में 1.5 करोड़ ऐसी किशोरियां हैं, जिनके साथ उनके पार्टनर, रिश्तेदार या दोस्तों ने जबरदस्ती सेक्स किया, लेकिन इनमें से सिर्फ एक फीसदी लड़कियों ने ही मदद मांगी या इसके खिलाफ आवाज़ उठायी।
संयुक्त राष्ट्र की बाल संस्था यूनिसेफ ने 40 से ज्यादा देशों के आंकड़े जमा किए और पाया कि अफ्रीकी देश कैमरून में यौन हिंसा की दर सबसे ज्यादा है। वहां हर छह किशोरियों में से एक को सेक्स के लिए मजबूर किया गया है। इस बारे में रिपोर्ट तैयार करने वाली क्लाउडिया कापा ने बताया “लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा के पीछे यह सोच काम करती हैं कि पुरुष महिलाओं को जैसे चाहे इस्तेमाल कर सकता है।”

जरुर पढ़ें:  पाकिस्तान के सबसे लंबे इंसान को देखते ही लड़कियां क्यों कर देती हैं शादी से इनकार?
DEMO PIC

ऐसे ज्यादातर मामलों में यौन शोषण करने वाला पीड़िता का परिचित ही होता है। इस तरह के यौन अपराधों के पीछे ज्यादातर पतियों, बॉयफ्रेंड्स, परिवार के सदस्यों, दोस्तों और सहपाठियों का हाथ होता है। यूनिसेफ का कहना है कि किशोर लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी बाधा बन सकती है। इन लक्ष्यों के तहत 2030 तक गरीबी, भूख और लैंगिक असमानता को खत्म करने के साथ साथ धरती को भी बचाना है।

SEXUAL HARRASSMENT

जिन लड़कियों को सेक्स के लिए मजबूर किया गया, उनकी तादाद 1.5 करोड़ से ऊपर है क्योंकि बहुत सी लड़कियां इस बारे में किसी को बताना ही नहीं चाहती हैं। इसके अलावा 1.5 करोड़ के आंकड़े में बहुत से देशों का डाटा शामिल नहीं है। इन अपराधों में डॉमिनिकन रिपब्लिक के पर्यटन उद्योग में बच्चों के यौन शोषण से लेकर फिलीपींस में ऑनलाइन सेक्स अपराधों के मामले भी शामिल हैं। रिपोर्ट में अफ्रीकी देश मलावी में इस हिंसा से निपटने के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स का भी जिक्र है। वहां बच्चों को स्कूलों में आत्मरक्षा के उपाय सिखाये जा रहे हैं। बीते दिनों फेसबुक और ट्विटर पर दुनिया भर की महिलाओं ने #MeToo के साथ यौन उत्पीड़न के अपने अनुभवों को साझा किया था।

जरुर पढ़ें:  ...तो इसलिए चांद पर नहीं मिटते इंसानों के पैरों के निशान
DEMO PIC

यूनिसेफ इन समस्याओं से निपटने के लिए बच्चों की सोच को विकसित करने के लिए उन्हें यौन समस्याओ और अपराधों के बारे में भी जागरूक करने की बात कर रहा है। इसके लिए बच्चों और किशोरियों के शिक्षक और शिक्षिकाओं को इस मुद्दे को लेकर काफी मेहनत करनी पड़ेगी, ताकि इस तरह की यौन उत्पीडन की समस्याओं का खात्मा किया जा सके।

Support Us

वीके न्यूज़ बिना कार्पोरेट मदद और फंडिग से चलने वाला संस्थान हैं. निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए हमें मदद करें.